Monday, Jun 15, 2026 | Last Update : 11:06 PM IST
दिल्ली का पुराना किला एक रोचक पर्यटक स्थल है। दिल्ली के सभी किलों में सबसे पुराना होने के साथ-साथ यह दिल्ली की सभी संरचनाओं में भी सबसे पुराना भी है और यह इन्द्रप्रस्थ नामक स्थान पर स्थित है जो कि एक विख्यात शहर था।पुराना किला यमुना नदी के किनारे देश की राजधानी दिल्ली में स्तिथ है किले का निर्माण शेर शाह सूरी ने सन १५३८ में करवाया था | १६ वि शताब्दी में पुराने किला का निर्माण हुआ था इस किले की ख़ास बात ये है की इसकी दीवारे बहुत ही मजबूत है और किले में तीन द्वार और एक मस्जिद है, पुराने किले की चहर दीवारी लगभग २.४ किलोमीटर लम्बी है , किले के अन्दर तीन दरवाजे है बारा दरवाजा, हुमायू दरवाजा तथा उत्तर की ओर का द्वार “तलाकी दरवाजा” कहलाता है। यह स्पष्ट नहीं है कि कब और क्यों इस दरवाज़े के उपयोग को प्रतिबंधित किया गया। यह किला मुग़ल, हिंदू तथा अफघानी वास्तुकला के समन्वय का एक सुंदर नमूना माना जाता है | पुराना किला दिल्ली के बड़े दरवाजे का नाम से भी प्रसिद्ध है ऐसा भी कहा जाता है कि हुमायु की मृत्यु इसी किले गिरने से हुई थी |

हलाँकि ऐसा माना जाता है यह किला हुमायूँ, शेरशाह और हेमचन्द्र जैसे शासकों, जिन्हों ने यहाँ से शासन किया, के लिये अशुभ था। पुराना किला के आस-पास कई रोचक इमारते हैं जिनमें शेरशाह द्वारा बनवाई किला-ए-कुह्ना मस्जिद, अष्टभुजाकार लाल बलुये पत्थर वाली दोमंजिला लाट शेर मण्डल, सम्राट अकबर को पालने वाली माँ महम अंगा द्वारा निर्मित मस्जिद कैरुल मंजिल और शेरगढ़ के लिये दक्षिणी दरवाजा शामिल हैं। किले की मजबूत और मोटी दीवारों के तीन द्वारों पर दोनो तरफ बुर्ज हैं। ये दीवारें 18 मीटर ऊँची और डेढ़ किमी लम्बी हैं जिनपर तीन मेहराबयुक्त प्रवेशद्वार हैं जिन्हें पश्चिम में बड़ा दरवाजा, दक्षिण में हुमायूँ का दरवाजा और तालुकी द्वार हैं, जिसे निषेध द्वार भी कहते हैं। सभी तीन प्रवेशद्वार विशाल दोमंजिला संरचनायें हैं जिनके दोनो ओर बुर्ज होने के साथ-साथ बाल्कनी या झरोखा और सतम्भयुक्त मण्डप हैं।पाडवो ने दिल्ली को सर्वप्रथम अपने राजधानी इंदरप्रस्थ के रूप में बसाया था| शेरशाह द्वारा बनवाया गया शेर मंडल जो अश्तकोनीय दो मंजिला भवन है। इसी भवन में हुमायूँ का पुस्तकालय हुआ करता था।
पुराने किले की पूर्वी दीवार के पास दुबारा खुदाई १९६९ से १९७३ के बीच भी की गई थी। वहां से महाभारत कालीन मानव बसासत के कोई प्रमाण तो नहीं मिले लेकिन मौर्य काल ३०० वर्ष ईसा पूर्व से लेकर प्रारंभिक मुग़ल काल तक अनवरत वह भूभाग मानव बसाहट से परिपूर्ण रहा। ऐसे प्रमाण मिलते गए हैं जिनमे काल विशेष के सिक्के, मनके, मिटटी के बर्तन, पकी मिटटी की (टेराकोटा) यक्ष यक्षियों की छोटी छोटी प्रतिमाएँ, लिपि युक्त मुद्राएँ (सील) आदि प्रमुख हैं जो किले के संग्रहालय में प्रर्दशित हैं। क़िले के अंदर एक संग्रालय भी है।
वर्तमान में पुराना किला एक ऐसा स्थान हैं जहाँ हर शाम दिल्ली के इतिहास का एक दृश्य-श्रृव्य शो आयोजित किया जाता है। पुराने किले में रोज शाम को लाइट साउंड शो दिखाया जाता है जिसमे पुराने किले की पूरे कहानी बहुत अच्छी तरह से दिखाई है तथा पुराने में नौका सवारी भी की है |
Purana Qilla
इंद्रप्रस्थ पूर्ण किला, प्रगति मैदान, नई दिल्ली
०११ - २३३६५३५८
लाइट & सांड शो टिकट
१०० टिकट व्यसक की और ५० रूपए १२ साल तक के बच्चे की|
पुराना किला का समय सुबह ७ बजे से शाम ५ बजे तक रोजाना|
लाइट और साउंड शो का टाइम
सितम्बर से अक्टूबर:- ७:०० - ८:०० शाम हिंदी में, सितम्बर से अक्टूबर ८ :३० -९:३० शाम अंग्रेजी में
नवंबर से जनवरी ६:०० - ७:०० शाम हिंदी में , ७:३० से ८:३० शाम अंग्रेजी
फरवरी से अप्रैल ७:०० -८:०० शाम हिंदी में ८:३० से ९:३० शाम अंग्रेजी में
मई से अगस्त ७:३० -८:३० शाम , ९:०० -१०:०० शाम अंग्रेजी में
अधिक विस्तृत जाने के लिये
http://www.delhitourism.gov.in/delhitourism/tourist_place/purana_quila.jsp
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