Tuesday, Jun 16, 2026 | Last Update : 11:42 AM IST
नेशनल मेडिकल कमिशन बिल के खिलाफ डॉक्टरों का विरोध प्रदर्शन जारी है। दिल्ली में एम्स के डॉक्टर तीसरे दिन भी हड़ताल पर हैं। डॉक्टरों के हड़ताल के चलते स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से ठप पड़ गई हैं। जिसका खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। हड़ताल की वजह से मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
डॉक्टरों के विरोध के बीच गुरुवार को नरेंद्र मोदी सरकार ने राज्यसभा में एन.एम.सी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) बिल को पास कर दिया है। उल्लेखनी है कि २९ जुलाई को लोकसभा में यह बिल पास किया गया था। पूरे देश के डॉक्टर इस बिल के विरोध में पिछले तीन दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।
-इस विधेयक की धारा ३२ के तहत नीम-हकीमी को वैध करने का प्रवधान किया जा रहा है। जिसके कारण इंडियन मेडिकल एसोसिएशन इसका विरोध कर रहा है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन का मानना है कि इस विधेयक के द्वारा लोगों की सुरक्षा के साथ समझौता किया जा रहा है। साथ ही आई.एम.ए ने इसे लोकतंत्र पर प्रहार भी बताया है।
क्या है नेशनल मेडिकल काउंसिल बिल २०१९
भारत में अभी तक मेडिकल संस्थानों और डॉक्टरों रजिस्ट्रेशन से संबंधित काम मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की देखरेख में होता है। बिल पास हो जाने के बाद एम.बी.बी.एस(MBBS) पास करने वाले मेडिकल छात्रों को प्रैक्टिस के लिए एग्जिट टेस्ट देना जरूरी होगा। यहां बता दें कि अभी एग्जिट टेस्ट सिर्फ विदेश से मेडिकल पढ़कर आने वाले छात्रों को ही देना होता है। यही नहीं एन.एम.सी(NMC) बिल के सेक्शन ३२ में ३.५ लाख नॉन मेडिकल शख्स को लाइसेंस देकर सभी प्रकार की दवाइयां लिखने और इलाज करने का कानूनी अधिकार दिया जा रहा है, जिसका डॉक्टर विरोध कर रहे हैं।
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