Celebrating Festivals across the World

Sunday, Jun 23, 2024 | Last Update : 12:39 AM IST


Festivals

  • हनुमान जयंती २०१९: झारखंड के गुमला जिले की इस गुफा में हुआ था हनुमानजी का जन्म

    हनुमान जयंती २०१९: झारखंड के गुमला जिले की इस गुफा में हुआ था हनुमानजी का जन्म

    हनुमान जी को भगवान शिव का ११वां अवतार माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि हनुमानजी का जन्म झारखंड के गुमला जिले के आंजनधाम स्थित एक पहाड़ी की गुफा में हुआ था। जिस गुफा में भगवान हनुमान का जन्म हुआ था, उसका दरवाजा कलयुग में अपने आप बंद हो गया। गुफा के दरवाजे को भगवान हनुमान की माता अंजनी ने स्वयं बंद कर लिया, क्योंकि स्थानीय लोगों द्वारा वहां दी गई बलि से वे नाराज थीं। इस गुफा का प्रमाण आज भी  मौजूद है।

  • चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त और विधि

    चैत्र पूर्णिमा शुभ मुहूर्त और विधि

    चैत्र पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बहुत खास महत्व दिया जाता है। हिंदूओं में तो यह दिन विशेष रूप से पावन माना जाता है। इस दिन से ही हिंदूओं में वर्ष का प्रथम चंद्र मास भी शुरु होता है। इस दिन लोग उपवास कर चंद्रमा की पूजा करते है। इस दिन को इस लिए भी भाग्यशाली माना जाता है क्योंकि समस्त उत्तर भारत में इस दिन राम भक्त हनुमान जी की जयंती भी मनाई जाती है।

  • महाशिवरात्रि  शिवलिंग के अभिषेक का महत्व

    महाशिवरात्रि शिवलिंग के अभिषेक का महत्व

    शिवलिंग की पूजा से जीवन बाधा रहित हो जाता है और सभी प्रकार के भय, चिंता व कष्‍टों से मुक्ति मिल जाती है। रुद्राभिषेक का अर्थ है भगवान रुद्र का अभिषेक अर्थात शिवलिंग पर रुद्र के मंत्रों के द्वारा अभिषेक करना।

  • महाशिवरात्रि व्रत विधि

    महाशिवरात्रि व्रत विधि

    इस साल २१ फरवरी २०२०  को महाशिवरात्रि मनाई जाएगी। इस दिन देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगी रहेगी।

  • सरस्वती पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये काम

    सरस्वती पूजा के दौरान भूलकर भी न करें ये काम

    इस साल सरस्वती पूजा ९ और १० फरवरी को मनाई जा रही है। देश के कुछ भागों में चतुर्थी तिथि ९ तारीख को दोपहर से ही समाप्त हो जा रही है और पंचमी तिथि शुरू हो रही है और १० तारीख को पंचमी तिथि २ बजकर ९ मिनट तक रहेगी। इस कारण सरस्वती व बसंत पंचमी दो दिन मनाई जा रही है।

  • जानिए 'पोंगल' पर्व, से जुड़ी पौराणिक कथा

    जानिए 'पोंगल' पर्व, से जुड़ी पौराणिक कथा

    प्राकृतिक को समर्पित यह पर्व चार दिनों तक मनाया जाता है। इस पर्व के पहले दिन अच्छी फसल के लिए लोग इंद्रदेव की पूजा एवं आराधना करते है। दूसरी दिन भगवान सूर्य की पूजा व अर्चना की जाती है। तीसरी दिन शिव जी के बैल यानी नंदी की पूजा होती है और आखरी दिन काली पूजा कि जाती है जिसमें केवल महिलाएं शामिल होती है।