प्रारंभिक जीवन और गांधीवादी प्रभाव
गुल्ज़ारीलाल नंदा का जन्म 4 जुलाई 1898 को सियालकोट, पंजाब (अब पाकिस्तान में) में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र और कानून में अपनी पढ़ाई पूरी की। महात्मा गांधी के विचारों से गहराई से प्रभावित होकर, वे 1921 में असहयोग आंदोलन में शामिल हो गए। उन्होंने अपने प्रारंभिक करियर का एक बड़ा हिस्सा श्रम कल्याण के लिए समर्पित किया और अनासूया साराभाई के साथ मिलकर अहमदाबाद टेक्सटाइल लेबर एसोसिएशन का गठन किया।
दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री
भारतीय राजनीतिक इतिहास में नंदा जी का एक अनूठा स्थान है, वे देश के एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने दो बार कार्यवाहक प्रधानमंत्री (Interim Prime Minister) के रूप में कार्य किया। 27 मई 1964 को जवाहरलाल नेहरू के आकस्मिक निधन के बाद वे पहली बार 13 दिनों के लिए प्रधानमंत्री बने। इसके बाद, 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री के दुखद निधन के बाद उन्होंने फिर से 13 दिनों के लिए देश की कमान संभाली। दोनों ही मौकों पर उन्होंने देश को नाजुक राजनीतिक दौर से सुरक्षित बाहर निकाला।
आर्थिक योजना और मंत्री पद
वे भारत की शुरुआती अर्थव्यवस्था को आकार देने में गहराई से जुड़े थे और उन्होंने शुरुआती वर्षों में योजना आयोग (Planning Commission) के उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। केंद्रीय मंत्रिमंडल में, नंदा जी ने 1963 से 1966 तक केंद्रीय गृह मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली और साथ ही रेल मंत्रालय का कार्यभार भी देखा।
उत्तरार्ध जीवन, ईमानदारी और निधन
अपने पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान, नंदा जी को उनकी बेदाग ईमानदारी, सरल जीवन शैली और व्यक्तिगत संपत्ति बनाने से दूर रहने के लिए सराहा गया। वे जीवन के अंतिम दिनों तक एक किराए के मकान में रहे। 15 जनवरी 1998 को 99 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
सर्वोच्च नागरिक सम्मान
राष्ट्र के प्रति उनकी निःस्वार्थ जनसेवा और अटूट ईमानदारी के सम्मान में, गुल्ज़ारीलाल नंदा को 1997 में भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था।