अरुण जेटली जीवन परिचय

Aazad Staff

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अरुण जेटली की विस्तृत जीवनी। जानें उनके शुरुआती जीवन, कानूनी करियर, वित्त मंत्री के रूप में जीएसटी लागू करने में उनकी भूमिका, डीडीसीए अध्यक्षता और मरणोपरांत मिले पद्म विभूषण सम्मान के बारे में।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

अरुण जेटली का जन्म 28 दिसंबर 1952 को नई दिल्ली में हुआ था। उनके पिता महाराज किशन जेटली एक जाने-माने वकील थे। उन्होंने सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से पढ़ाई की और श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) से कॉमर्स में स्नातक किया। बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्होंने 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया।

कानूनी करियर

राजनीति में पूर्णकालिक रूप से आने से पहले, अरुण जेटली भारत के सर्वोच्च न्यायालय में एक अत्यंत सफल वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) थे। 1989 में, उन्हें भारत का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (Additional Solicitor General) नियुक्त किया गया था। अपने कानूनी करियर के दौरान उन्होंने कई बड़े कॉर्पोरेट मामलों और सरकारी निकायों का प्रतिनिधित्व किया।

प्रमुख मंत्री पद और आर्थिक सुधार

अरुण जेटली ने प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और नरेंद्र मोदी की सरकारों में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला। केंद्रीय वित्त मंत्री (2014-2019) के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने देश में बड़े आर्थिक सुधारों का नेतृत्व किया। उन्होंने 2017 में ऐतिहासिक वस्तु एवं सेवा कर (GST) को लागू करने और 2016 में दिवाला और दिवालियापन संहिता (IBC) को पारित कराने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उन्होंने रक्षा, कॉर्पोरेट मामले और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालयों का प्रभार भी संभाला था।

खेल प्रशासन

राजनीति और कानून के अलावा, वह खेल प्रशासन से भी गहराई से जुड़े थे। उन्होंने 1999 से 2013 तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (DDCA) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया और दिल्ली में क्रिकेट के बुनियादी ढांचे को मजबूत किया। उनके योगदान के सम्मान में, 2019 में नई दिल्ली के प्रतिष्ठित फिरोज शाह कोटला स्टेडियम का नाम बदलकर अरुण जेटली स्टेडियम कर दिया गया।

निधन और मरणोपरांत नागरिक सम्मान

स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 24 अगस्त 2019 को नई दिल्ली के एम्स (AIIMS) अस्पताल में अरुण जेटली का निधन हो गया। राष्ट्र के प्रति उनकी विशिष्ट सार्वजनिक सेवा के सम्मान में, उन्हें 2020 में मरणोपरांत भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।

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