दुनिया की 50 फीसदी आबादी आज भी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से है वंचित

Aazad Staff

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सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करने और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने के उद्देश्य के साथ इसे शुरू किया गया था।

विकासशील देशों में यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य की दिशा में उठाए जाने वाले कदमों पर चर्चा के लिए आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने हाल ही एक वेबिनार आयोजित किया। इस वेबिनार का आयोजन एसडी गुप्ता स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ (एसडीजी-एसपीएच) के तत्वावधान में किया गया।

आईआईएचएमआर के ट्रस्टी सचिव डॉ. अशोक अग्रवाल, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. फिरोजुद्दीन फिरोज, आयुष्मान भारत के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डॉ. इंदुभूषण, आईएएस, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन डॉ. एस डी गुप्ता और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी के प्रेसीडेंट डाॅ. पी आर सोडानी ने इस चर्चा में भाग लिया। डाॅ. डी. के. मंगल, प्रोफेसर, और डीन (रिसर्च), सलाहकार, एसडी गुप्ता स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने सत्र का संचालन किया।

वेबिनार के दौरान विकासशील देशों में स्वास्थ्य कवरेज के महत्व पर महत्वपूर्ण चर्चा की गई और दुनिया भर में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बुनियादी पहुंच की आवश्यकता से संबंधित चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया।वेबिनार में विचार व्यक्त करते हुए आईआईएचएमआर के ट्रस्टी सचिव डॉ. अशोक अग्रवाल ने कहा, ‘‘सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. एस डी गुप्ता के योगदान को सम्मानित करने के लिए ही एसडी गुप्ता स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की शुरुआत की गई है।

सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा से जुड़े लोगों को प्रशिक्षित करने और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना करने के उद्देश्य के साथ इसे शुरू किया गया था। यह संगठन छात्रों को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में अग्रणी और विशेषज्ञ बनाते हुए उन्हें विश्व स्तर पर स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार के लिए समर्पित करना चाहता है।’’इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ अफगानिस्तान के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ. फिरोजुद्दीन फिरोज ने कहा, ‘‘दुनिया भर में आज भी 50 फीसदी से अधिक लोग आवश्यक, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 930 मिलियन से अधिक लोगों को या दुनिया की 12 फीसदी आबादी को स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के लिए अपने घरेलू बजट का कम से कम 10 फीसदी हिस्सा खर्च करना होता है। यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज के जरिये ही हम अपने सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स को हासिल कर सकते है, क्योंकि यूनिवर्सल हैल्थ कवरेज संवर्धन, रोकथाम, उपचार और पुनर्वास पर केंद्रित है। यूनिवर्सल कवरेज का मतलब लागत की परवाह किए बिना सभी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए मुफ्त कवरेज नहीं है, दरअसल यह स्वास्थ्य प्रणालियों, स्वास्थ्य सेवा वितरण, स्वास्थ्य कार्यबल, स्वास्थ्य सुविधा और कम्युनिकेशन नेटवर्क के साथ-साथ गवर्नेंस से संबंधित भी है। जब तक हम समानता को हासिल नहीं करते, तब तक यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज में सुधार नहीं किया जा सकता ।

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