जानियें कौन था तैमूर और कैसी थी उसके भारत में क्रूरता की कहानी

Aazad Staff

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तैमूरलंग उर्फ तैमूर लंगड़ा (1336-1405) तुर्की से चलकर हिंदुस्तान आया था। 1369 में तैमूर समरकंद का बादशाह बन गया। अपने पूर्वज चंगेज खान की की तरह तैमूर भी पूरे यूरोप और एशिया को अपने वश में करना चाहता था।

तैमूरलंग उर्फ तैमूर लंगड़ा (1336-1405) तुर्की से चलकर हिंदुस्तान आया था।उसका जन्म 1336 में बारअक्स में हुआ था।1369 में तैमूर को समरकंद का बादशाह बना दिया गया। 1393 तक पूरे मेसोपोटामिया यानी इराक तक तैमूर का अधिकार हो गया।

भारत एक समय में सोने की चिड़िया कहलाता था।भारत की गिनती अमीर देशों में की जाती थी। हिंदुस्तान की राजधानी दिल्ली के बारे में तैमूर ने काफ़ी कुछ सुना था। यदि दिल्ली पर एक सफल हमला हो सके तो लूट में बहुत माल मिलने की उम्मीद थी। इस मंसूबे के साथ तैमूरलंग ने 13 अक्टूबर 1398 को सिंधु, रावी और झेलम को पार कर अपने सैनिकों के साथ भारत में दाखिल हुआ। उस दौरान उत्तर भारत में तुगलक वंश का राज था।

तैमूर ने भटनेर और पानीपत होते हुए दिल्ली का रुख किया। तैमूर 15 दिन तक यहां की संपत्तियों को लूटता रहा और यहां के कारिगरों को बंदी बनाकर ले जाता रहा।  भारते के ही कारिगरों से तैमूर ने इराक में में जामा मस्जिद बनवाई थी।

ऐसा कहा जता है कि दिल्ली में तैमूर के आक्रमण के दौरान हिन्दुओं धर्म की महिलाओं ने जौहर की राजपूती रस्म अदा की थी। कहा जाता है कि तैमूर चंगेज खान से भी क्रूर राजा था। वह इंसानों को कसाईयों की तरह काट देता था। ऐसा कहा जाता है कि दिल्ली में 15 दिनों तक लूट पात करने के दौरान उसने शहर को कसाईखाना बना दिया था। इसके बाद कश्मीर को लूटता हुआ वह समरकंद वापस लौट गया। तैमूर के जाने के बाद दिल्ली मुर्दों का शहर रह गया था।

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चंगेज़ और तैमूर में एक बड़ा फ़र्क़ था।  चंगेज़ के क़ानून में सिपाहियों को खुली लूट-पाट की मनाही थी, लेकिन तैमूर के लिए लूट और क़त्लेआम मामूली बातें थीं क्रूरता के मामले में वह चंगेज खान की तरह ही था। कहते हैं, एक जगह उसने दो हजार जिन्दा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उन्हें ईंट और गारे में चुनवा दिया।

तैमूर को उसकी मिलिट्री स्ट्रैटजी के लिए भी जाना जाता है। एक कुशल सेनापति जिसने अपने सैनिकों को हर तरह की लड़ाई के लिए तैयार किया। मार्च 1399 में वापस लौट गया। वापस लौट कर उसने महान ऑटोमन साम्राज्य के शासक को हराया। सन 1405 में इसकी मौत हो गई।

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