डेंगू के लक्षण और सावधानियां

Aazad Staff

Should Know

डेंगू एक वायरल रोग है जो संक्रमित एडीज़ मच्छर के काटने से होता है। यह मच्छर अधिकतर दिन के समय काटता है। डेंगू होने पर क्या किया जाए और क्या सावधानी रखनी चाहिए इसकी जानकारी होने से बचाव आसान है।

डेंगू मादा एडीज इजिप्टी मच्छर के काटने से होता है। इन मच्छरों के शरीर पर चीते जैसी धारियां होती हैं। डेंगू मच्छर दिन में, खासकर सुबह काटते हैं। डेंगू का असर बरसात के मौसम में ज्यादा होता है। क्योंकि इस मौसम में मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां होती हैं। एडीज इजिप्टी मच्छर बहुत ऊंचाई तक नहीं उड़ पाता।

डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों और सिर में तेज दर्द होता है। बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी से फैलने वाली बीमारी है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिरता है, इसलिए इसका उपचार तुरंत कराने की जरूरत होती है नहीं तो यह जानलेवा भी साबित हो सकता है। इसलिए यह बहुत महत्वपूर्ण हैं कि डेंगू के लक्षणों के बारे में जानकारी हो ताकि इसकी पहचान प्रारंभिक तौर पर हो सकें। तो आइए ऐसे कुछ लक्षणों को जानने की कोशिश करें जो डेंगू को इंगित करते हैं ।

डेंगू के लक्षण -

१. तेज़ बुखार

२. सरदर्द

३. उल्टी

४. मांपेशियों तथा हड्डियों में दर्द

५. त्वचा पर रैशेस

६-गले में हल्का-सा दर्द होना

हालांकि  ये सभी लक्षण डेंगू की ओर इशारा करें की जरुरी भी नहीं लेकिन इनमें से एक या अधिक लक्षणों का अनुभव होने पर जांच करवा लें।

 डेंगू के प्रकार

१. क्लासिकल (साधारण) डेंगू बुखार

२. डेंगू हैमरेजिक बुखार (DHF)

३. डेंगू शॉक सिंड्रोम (DSS)

बरतें एहतियात

-ठंडा पानी न पीएं, मैदा और बासी खाना न खाएं।

-खाने में हल्दी, अजवाइन, अदरक, हींग का ज्यादा-से-ज्यादा इस्तेमाल करें।

-इस मौसम में पत्ते वाली सब्जियां, अरबी, फूलगोभी न खाएं।

-हल्का खाना खाएं, जो आसानी से पच सके।

-पूरी नींद लें, खूब पानी पीएं और पानी को उबालकर पीएं।

-मिर्च मसाले और तला हुआ खाना न खाएं, भूख से कम खाएं, पेट भर न खाएं।

-खूब पानी पीएं। छाछ, नारियल पानी, नीबू पानी आदि खूब पिएं।

बरसात के दिनों में बुखार होने पर सिर्फ पैरासिटामोल (क्रोसिन, कैलपोल आदि) लें। एस्प्रिन (डिस्प्रिन, इकोस्प्रिन) या एनॉलजेसिक (ब्रूफिन, कॉम्बिफ्लेम आदि) बिल्कुल न लें। क्योंकि अगर डेंगू है तो एस्प्रिन या ब्रूफिन आदि लेने से प्लेटलेट्स कम हो सकती हैं और शरीर से ब्लीडिंग शुरू हो सकती है।

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