युवा दिवस के रुप में मनाया जाता है स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन

Aazad Staff

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39 वर्ष की उम्र में स्वामी विवेकानंद का निधन हो गया था। इनके अनमोल वचन निराशा में भी एक नई आशा की ओर ले जाते है।

12 जनवरी 1863 को जन्में स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन हर साल युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है। 11 सितंबर 1893 को अमेरिका के शिकागो में विश्व धर्म सम्मेलन के दौरान स्वामी विवेकानंद ने भाषण दिया था जिसे सुनकर हर भारतवासी का सिर गर्व से ऊंचा उठ गया, आज भी उस भाषण को याद किया जाता है। विवेकानंद ने अपने भाषण की शुरुआत 'मेरे अमेरिकी भाइयों और बहनों' के साथ की थी. उनकी इस लाइन ने सबका दिल ऐसा जीता कि पूरा हॉल तालियों की गूंज से भर उठा था।

स्वामी विवेकानंद के दादाजी दुर्गाचरण दत्त संस्‍कृत और फारसी के व‍िद्वान थे और सिर्फ 25 बरस की उम्र में घर-बार छोड़कर वो साधु बन गए थे। साल 1884 में पिता की मौत हो जाने के बाद घर की सारी जिम्मेदारी उन पर आ गई थी। स्‍वामी विवेकानंद ने 1 मई 1897 में कलकत्ता में रामकृष्ण मिशन और 9 दिसंबर 1898 को गंगा नदी के किनारे बेलूर में रामकृष्ण मठ की स्थापना की. यही नहीं उन्‍होंने 'योग', 'राजयोग' और 'ज्ञानयोग' जैसे ग्रंथों की रचना भी की।

मात्र 39 वर्ष की उम्र में उनका देहांत हो गया, लेकिन इतने कम समय में ही उन्होंने अपने जीवन और सिद्धांतों से लोगों के सामने आदर्श प्रस्तुत किया।

आइए आपको बतातें हैं स्वामी विवेकानंद द्वारा दिए गए कुछ अनमोल वचन -

  • जब तक आप खुद पे विश्वास नहीं करते तब तक आप भागवान पे विश्वास नहीं कर सकते।
  • एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
  • पवित्रता, धैर्य और उद्यम- ये तीनों गुण मैं एक साथ चाहता हूं।
  • जितना बड़ा संघर्ष होगा जीत उतनी ही शानदार होगी।

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