दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज का कुछ ऐसा था राजनीतिक सफर

Aazad Staff

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पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का निधन हो गया है। ६७ साल की उम्र में सुषमा स्वराज ने दिल्ली के एम्स में अंतिम सांस ली। वह पिछले काफी दिनों से बीमार चल रहीं थी।

भाजपा नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का ६७ वर्ष की उम्र में मंगलवार रात निधन हो गया। शाम को उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। सुषमा स्वराज पिछले काफी समय से अस्वस्थ चल रही थीं।  सुषमा स्वराज की पहचान एक प्रखर वक्ता की थी। वह जितना अपने सौम्य स्वभाव के लिए जानी जाती थीं, उतना ही अपने बुलंद हौसलों और बेबाकी के लिए भी जानी जाती थीं। आइए जानते हैं सुषमा स्वराज के राजनीतिक सफर के बारे में...

सुषमा स्वराज का जन्म १४  फरवरी १९५३ को हरियाणा के अंबाला में हुआ था। उन्होंने अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। इसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री ली।  वह भाषण और वाद—विवाद में हमेशा से आगे रहीं। उन्होंने ऐसी कई प्रतियोगिताओं में पुरस्कार भी हासिल किए।

सुषमा स्वराज का राजनीतिक सफर-

सुषमा स्वराज के राजनीतिक जीवन की शुरूआत भाजपा की ही छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई थी। छात्र राजनीति से ही वह काफी अच्छी प्रवक्ता थीं। वर्ष १९७७ में उन्हें मात्र २५ वर्ष की आयु में हरियाणा सरकार में कैबिनेट मंत्री बनाया गया था। उन्होंने अम्बाला छावनी विधानसभा क्षेत्र से हरियाणा विधानसभा के लिए विधायक का चुनाव जीता था। १९७७ से ७९ तक वह राज्य की श्रम मंत्री रहीं। ८० के दशक में भाजपा के गठन के वक्त ही वह पार्टी में शामिल हो गईं थीं। १९८७ व १९९० में भी वह अंबाला छावनी से विधायक चुनीं गईं।

महज २७ वर्ष की उम्र में वह हरियाणा में भाजपा की अध्यक्ष के लिए चुनी गई। सुषमा स्वराज तीन बार विधायक और छह बार सांसद रह चुकी हैं। अक्टूबर १९९८ में उन्होंने केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। बाद में जब विधानसभा चुनावों में पार्टी हार गई तो वे राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं। वर्ष १९९९ में उन्होंने आम चुनावों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के खिलाफ बेल्लारी संसदीय क्षेत्र, कर्नाटक से चुनाव लड़ा, लेकिन वे हार गईं। २००० में वे फिर से राज्यसभा में पहुंचीं थीं और उन्हें पुन: सूचना-प्रसारण मंत्री बना दिया गया। वे मई २००४ तक सरकार में रहीं। अप्रैल २००९ में वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा के लिए चुनी गईं और वे राज्यसभा में प्रतिपक्ष की उपनेता रहीं। बाद में, विदिशा से लोकसभा के लिए चुनी गईं और उन्हें लालकृष्ण आडवाणी के स्‍थान पर नेता प्रतिपक्ष बनाया गया।

अंतिम बार वर्ष २०१४ में वह विदर्भ से लोकसभा सांसद बनीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी। १५ वीं लोकसभा में उन्होंने बतौर नेता प्रतिपक्ष संसद में पार्टी का नेतृत्व किया। मोदी सरकार में उन्होंने बतौर विदेश मंत्री कई देशों की यात्रा की। उन्होंने अपने कार्यकाल में अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की मजबूत छवि बनाई।

सुप्रीम कोर्ट के वकील  से विवाह

सुषमा स्वराज  एक सफल नेता के साथ बेहद कुशल गृहणी भी थीं। सुषमा स्वराज ने कॉलेज के दोस्त स्वराज कौशल से लव मैरिज की थी। सुषमा ने १३ जुलाई १९७५ को शादी की थी। उनके पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने क्रिमिनल लॉयर हैं। वह देश के एडवोकेट जनरल और मिजोरम के गवर्नर भी रह चुके हैं। स्वराज कौशल १९९८  से २००४ तक हरियाणा के सांसद भी रह चुके हैं।

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