भारत के तिरंगे का महत्व

Aazad Staff

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स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले देश के राष्ट्रपति द्वारा शाम के समय भाषण पेश किया जाता है।

ब्रिटिश साम्राज्य ने 200 साल तक भारत पर राज्य किया। इस गुलामी की जंजीरों से देश को आजादी दिलाने के लिए हमारे देश के कई नौजवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी।  सालों से चले इस संघर्ष के बाद 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी मिली। इस दिन को राष्टीय पर्व के तौर पर हर भारतिय मनाता है।

इस दिन भारत के प्रधानमंत्री दिल्ली के लाल किले में प्रतिवर्ष ध्वजारोहण करते है। सर्वप्रथम भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु ने 15 अगस्त, 1947 को लाल किले के लाहौरी गेट के ऊपर भारत का तिरंगा (राष्ट्रीय ध्वज) फेहराया गया था। 22 जुलाई 1947 के दिन संविधान सभा ने तिरंगे को, देश के झंडे के रूप में स्वीकार किया था।

 तिरंगे के रंग का महत्व -

    1.  भारतीय राष्‍ट्रीय ध्‍वज की जो सबसे उपरी पट्टी है वो केसरिया रंग की है। केसरिया रंग शक्ति और साहस को प्रदर्शित करता है।     2.    ध्वज के बीच में सफ़ेद रंग है यह रंग जो शांति और सत्य का प्रतिक है।     3.    सबसे नीचे हरा रंग है जो वृधि और भूमि की पवित्रता व हरियाली  को संबोधित करता है।

बीच में सफ़ेद रंग के ऊपर एक अशोक चक्र है जिसको विधि का चक्र भी कहते हैं। इस चक्र का चिन्ह सारनाथ के शेर के स्तम्भ से लिया गया है, जिसका निर्माण अशोक ने करवाया था। ये चक्र न्याय का प्रतिक है। इसमें 24 तीलिया है जो नीले रंग की है।

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1757 ई. की प्लासी की लड़ाई और 1764 ई. का बक्सर के युद्ध के बाद भारतीयों द्वारा हार जाने के बाद अंग्रेजो ने बंगाल पर ब्रिटिश ईस्ट इण्डिया कंपनी द्वारा अपने शासन शिकंजा कसा। अपने शासन को और मजबूत करने के लिए अंग्रेजो ने कई नियम (एक्ट) बनाये।

देश को आजादी दिलाने के लिए 1857 में भारितियों ने ब्रिटिश सरकार का विरोध जताया था। इसकी शुरुआत 10 मई 1857 ई. में मेरठ से हुई. माना जाता है की 1857 का जो विद्रोह था वो बहुत बड़ा विद्रोह था। 1858 ई. में भारत का शासन कंपनी के हाथो से छिनकर ब्रिटिश क्राउन अर्थात ब्रिटेन की राजशाही के हाथो सोप दिया गया था।

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