जाने क्या है PNDT Act

Aazad Staff

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कन्या भ्रूण हत्या आमतौर पर मानवता और विशेष रूप से समूची स्त्री जाति के विरुद्ध सबसे जघन्य अपराध है। इसे रोकने के लिए PNDT Act बनाया गया। इसके तहत ३-५ साल तक की जेल व १० हजार से १ लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है। धारा १३३ के तहत जबरन गर्भपात कराने पर अजीवन कारावास का भी प्रावधान है।

गर्भ में लिंग की जांच कर भ्रूण हत्याओं पर अंकुश लगाने के लिए प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट  (PNDT Act)  की शुरुआत १९९४ मे की गई । ‘पीएनडीटी अधिनियम (PNDT Act) के तहत गर्भवती स्त्री का जबरन गर्भपात कराना कानूनी अपराध है। हालांकि देश में आज भी कई ऐसे राज्य है जहां बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जाता है। लड़कियों को लेकर आज भी कई  लोगों की सोच दकियानूसी है जिसकी वजह से उन्हें दुनिया में आने से पहले ही गर्भ में मार दिया जाता है।

कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए  प्री-नेटल डायग्नोस्टिक टेक्निक ‘पीएनडीटी’ एक्ट (PNDT Act) बनाया गया इस अधिनियम (एक्ट) के तहत  अगर पूर्व गर्भाधान और जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच कराई जाती है तो वे गैर कानूनी है।   ऐसे में अल्ट्रासाउंड या अल्ट्रासोनोग्राफी कराने वाले जोड़े या करने वाले डाक्टर, लैब कर्मी को तीन से पांच साल की सजा और १० से ५० हजार जुर्माने की सजा का प्रावधान है।[

PNDT Act के तहत क़ानूनी प्रावधान -

१. गर्भधारण पूर्व और प्रसव पूर्व निदान तकनीक अधिनियम, १९९४ के तहत गर्भाधारण पूर्व या बाद लिंग चयन और जन्‍म से पहले कन्‍या भ्रूण हत्‍या के लिए लिंग परीक्षण करना गुनाह है।

२. भ्रूण परीक्षण के लिए सहयोग देना व विज्ञापन करना कानूनी अपराध है। इसके तहत ३ से ५ साल तक की जेल व १० हजार से १ लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

३. गर्भवती स्त्री का जबर्दस्ती गर्भपात करवाना अपराध है। ऐसा करने पर आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

४. धारा ३१३ के तहत गर्भवती महिला की मर्जी के बिना गर्भपात करवाने वाले को आजीवन कारावास या जुर्माने से भी दण्डित किया जा सकता है।

५ धारा ३१४ के तहत गर्भपात करने के मकसद से किये गए कार्यों से अगर महिला की मौत हो जाती है तो दस साल की कारावास या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।

६. आईपीसी की धारा ३१५ के तहत शिशु को जीवित पैदा होने से रोकने या जन्म के बाद उसकी मृत्यु मकसद से किया गया कार्य अपराध होता है, ऐसा करने वाले को दस साल की सजा या जुर्माना दोनों हो सकता है।

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