चुनाव आयोग के ४८ घंटे प्रतिबंध लगाए जाने पर बोली मायावती - यह दिन काला दिवस के रूप में किया जाएगा याद

Aazad Staff

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बसपा प्रमुख मायावती (Mayawati) ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाए गए ४८ घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला बताया। इसके साथ ही उन्होंने इसे एक साजिश और लोकतंत्र की हत्या बताया है।

मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा लगाए गए ४८ घंटे के प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया है और उनपर लगाए गए ४८ घेंटे के प्रतिबंध को बरकरार रखा है।  कोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा, ‘हम कह सकते हैं कि चुनाव आयोग ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया और आचार सहिंता तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही।

वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने चुनाव आयोग द्वारा उन पर लगाये गये ४८ घंटे के प्रतिबंध को दबाव में लिया गया फैसला बताते हुए इसे साजिश और लोकतंत्र की हत्या बताया है। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा ''संविधान के अनुच्छेद १९ के तहत किसी को अपनी बात रखने से वंचित नहीं किया जा सकता लेकिन आयोग ने अभूतपूर्व आदेश देकर मुझे बगैर किसी सुनवाई के असंवैधानिक तरीके से क्रूरतापूर्वक वंचित कर दिया। यह दिन काला दिवस के रूप में याद किया जाएगा। इसके साथ ही माया ने कहा कि यह फैसला किसी दबाव में लिया गया ही प्रतीत होता है।''

बता दें कि चुनाव आयोग ने मायावती पर ४८ घंटों के लिए किसी भी प्रकार के चुनावी गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगा रखा है। चुनाव आयोग ने उन पर यह रोक चुनावी रैलियों के दौरान अभद्र भाषा इस्तेमाल करने के मद्दे नजर लगाया है।

मायावती पर ११ अप्रैल को उत्तर प्रदेश के देवबंद रैली के दौरान भड़काऊ भाषण देने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप है। बता दें कि चुनाव आयोग ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर ७२ घंटे का प्रतिबंध लागाया है। इसके साथ ही सपा नेता आजम खां और भाजपा सांसद मेनका गांधी पर भी चुनाव आयोग ने चुनावी रैली के दौरान प्रतिबंध लगा रखा है।

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