मुहम्मद बिन तुगलक ने जारी किया था ऐसा फरमान जिसे आज भी याद किया जाता है।

Aazad Staff

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तुगलक एक ऐसा बादशाह था जिसने चांदी के सिक्कों के बदले ताम्बे के सिक्के चलाने शुरु किए

मोहम्मद बिन तुगलक का मूल नाम जौन खां था। मोहम्मद बिन तुगलक के पिता का नाम गयासुद्दीन तुगलक था। इसका शासनकाल 1325 - 1351 तक  रहा। ये अरबी, फारसी का महान विद्ववान मना जाता था। गणित, चिकित्सा, दर्शन, तर्कसास्त्र में पारंगत था। ज्यादा पढ़ा लिखा और जानकार होने के बावजूद भी इसकी अधिकतर नीतिया असफल रही। इसे दिल्ली का मुर्ख राजा कहा जाता था।

14वीं सदी में दिल्ली के तख्त पर 26 वर्ष तक शासन करने वाले मोहम्मद बिन तुगलक का नाम न सिर्फ उसकी बादशाहत के लिए जाना जाता है बल्कि उसके लम्बे चौढ़े साम्राज्य के लिए जाना-पहचाना है।

दिल्ली सल्तनत पर राज करने वाला मोहम्मद बिन तुगलक  ने 1325 ईस्वी में यहां कि सत्ता हासिल की। 26 साल तक उसने दिल्ली की सल्तनत पर राज किया।उसके शासनकाल में सल्तनत-ए-दिल्ली का भौगोलिक क्षेत्रफल सर्वाधिक रहा, जिसमें लगभग पूरा भारतीय उपमहाद्वीप शामिल था।

मोहम्मद बिन तुगलक का एक ऐसा फरमान जिसे रातों रात अमल में लाया गया जो बेहद चर्चित फैसला था रातोंरात चांदी के सिक्कों की जगह तांबे के सिक्के चलवाना। जिसका परिणाम ये निकल कि लोगों ने उनकी नकल करते हुए उन्हें घरों में ही ढालना शुरू कर दिया, तथा उन्हीं से जज़िया (टैक्स) अदार करने लगे। इसके कारण इससे राजस्व की भारी क्षति हुई, और फिर उस क्षति को पूरा करने के लिए उसने करों में भारी वृद्धि भी की।

मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी राजधानी को बदल दिया था। वह अपनी राजधानी दिल्ली से दौलताबाद  ले गया। बता दें कि एक समय में दौलताबाद मुम्बई में था। यह माना जाता है की मंगोलों के आक्रमण से दिल्ली को खतरा हो गया था और इसी कारण वह अपनी राजधानी को दिल्ली से महाराष्ट्र के देवगिरी जिसे दौलताबाद भी कहा जाता है  ले जाने का फैसला किया।

मुहम्मद बिन तुगलक का कराचील अभियान जो की  एक सैनिक भूल के कारण असफल हो गया. खुसरो मल्लिक जो इस अभियान का सेना नायक था शत्रु क्षेत्र में बहुत अन्दर तक घुस गया.यह निर्णय सुल्तान की अनुमति के बिना लिया गया था. इसका बहुत भयंकर परिणाम हुआ, यह माना जाता है की 10 हजार की सेना में से केवल दस लोग ही वापस लौट कर आये।

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