जाने भारत का वो पहला समाचार पत्र जिसने अंग्रेज़ हुकूमत को हिला दिया

Aazad Staff

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सोशल मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है लेकिन आज मीडिया को जितनी आज़ादी मिली है इतनी आज़ादी अंग्रेजी हुकूमत के दौरान नहीं थी।

भारत का पहला समाचार पत्र 'बंगाल गज़ट’ था। इस समाचार पत्र की स्थापना साल 1780 में हुई थी। 'बंगाल गज़ट' समाचार पत्र ने उस वक़्त अंग्रेज़ साम्राज्य को आईना दिखाने का काम किया था जिस वक्त भारत गुलामी की जंजीरों में बंधा हुआ था। इस अखबार ने हुकूमत को प्रेस की ताक़त का एहसास करवाया था। बंगाल गज़ट की शुरुआत जेम्स ऑगस्टस हिक्की ने की थी। बंगाल गज़ट ने कई लोगों के भ्रष्टाचार, घूसकांड और मानवाधिकार उल्लंघनों को उजागर किया था।

बता दें कि ये चार पृष्ठों का अखबार हुआ करता था। यह अखबार  सप्ताह में एक बार प्रकाशित हुआ करता था। जेम्स ऑगस्टस हिकी भारत के पहले पत्रकार थे, जिन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता के लिए ब्रिटिश सरकार से संघर्ष किया और बिना डरे भ्रष्टाचार व ब्रिटिश शासन की आलोचना की।

इस अखबार में ज्यादातर ईस्ट इंडिया कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों के व्यक्तिगत जीवन पर लेख छपते थे। जब हिकी ने अपने अख़बार में एक बार गवर्नर की पत्नी के दुराचरण के बारे में छापा तो ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारियों को बहुत नागवार गुजरा। अंतत: उसे चार  महीने के लिए जेल भेजा गया और पांच सौ रुपये का जुर्माना ठोंक दिया गया, लेकिन हिकी ने ईस्ट इंडिया कंपनी के इस कृत्य.से नही डरा और ब्रिटिश शासकों  द्वारा किए जा रहे बर्बर अत्याचार और भ्रष्टाचार की आलोचना अपने अखबार में छापने से परहेज  नहीं किया।

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दूसरी बार जब उन्होंने  अखबार में गवर्नर और सर्वोच्च न्यायाधीश द्वारा किए जा रहे भ्रष्टाचार की  आलोचना की, तो उस पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया और एक साल के लिए जेल में डाला गया। उसके बाद "हिकी बंगाल गजट" जिसे" बंगाल गजेटिअन " भी कहा जाता था, को ब्रिटिश शासन ने जब्त कर लिया और 23 मार्च 1782 को अखबार का प्रकाशन बंद हो गया। हिकी बंगाल गजट के प्रकाशन का एक कारण बाजार के लिए सूचनाएं उपलब्ध कराना था। यह माना जाता था कि वह ब्रिटिश प्रशासन के विरोध के लिए निकाला गया गलत और भ्रामक है। इस अखबार में अंग्रेजी प्रशासन में व्याप्त भ्रष्‍टाचार और रिश्वतखोरी के समाचार प्रमुख रूप से छापे जाते थे।

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