तकनीकी सहायता और उचित कौशल विकास के माध्यम से दिव्यांग कैसे अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं? - प्रशांत अग्रवाल

Aazad Staff

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भारत में दिव्यांगों की कुल आबादी में से केवल 36 फीसदी लोग ही कार्यरत हैं, इनमें से 31 फीसदी खेतिहर मजदूर हैं।

लेखक नारायण सेवा संस्थान के अध्यक्ष हैं, जो कि दिव्यांग और वंचित वर्ग की सेवा करने वाला एक गैर-लाभकारी संगठन है विश्व बैंक के अनुसार भारत की 130 करोड़ से अधिक की कुल आबादी में से लगभग 8 करोड़ लोग दिव्यांगों की श्रेणी में आते हैं। कुल दिव्यांगों में से लगभग 70 प्रतिशत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं।

ऐसी कई चीजें हैं जिन्हें दिव्यांग करना चाहते हैं या करने का सपना देखते हैं। हालांकि उचित सुविधाओं और सही मार्गदर्शन की कमी के कारण वे अपने इन सपनों को पूरा नहीं कर पाते हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार देश में ज्यादातर दिव्यांग 10-19 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। ये ऐसे लोग हैं, जो आत्मनिर्भर होना चाहते हैं, एक अच्छी नौकरी के साथ रहने के लिए एक बेहतर घर और एक ऐसा सामान्य जीवन जीना चाहते हैं, जहां वे भी जब चाहें, लोगों के साथ घूम-फिर सकते हैं।

अन्य बच्चों की तुलना में दिव्यांग बच्चों के स्कूल छोड़ने की संभावना 5 गुना अधिक होती है। भारत में दिव्यांगों की कुल आबादी में से केवल 36 फीसदी लोग ही कार्यरत हैं, इनमें से 31 फीसदी खेतिहर मजदूर हैं। इस वजह से दिव्यांग लोगों को अक्सर बेरोजगारी का सामना करना होता है और उन्हें दूसरों पर निर्भर जिंदगी जीने पर मजबूर होना पड़ता है।

दिव्यांग लोगों को इन मुश्किलों से बाहर निकालने में मदद करने के लिए उन्नत तकनीक और शिक्षा एक बड़ी भूमिका निभा सकती है। टैक्नोलॉजी असंभव को संभव में बदलने में मदद कर सकती है, और ऐसे अनेक उदाहरण हमारे सामने हैं, जैसे स्टीफन हॉकिंग को ही याद कर लें। प्रौद्योगिकी के अलावा, कौशल से दिव्यांग लोगों को उचित प्रशिक्षण, शिक्षा और अच्छी नौकरी पाने में मदद मिल सकती है। कौशल आधारित पाठ्यक्रम लोगों को उपकरण और मशीनरी के साथ काम करने का प्रशिक्षण देते हैं और उन्हें हाथ का हुनर सिखाते हैं।

एक नजर चंद ऐसी टैक्नोलॉजी पर, जो दिव्यांग लोगों के लिए मददगार साबित हो सकती हैं- - 1. नेत्रहीनों के लिए नेविगेटर- दृष्टिबाधित दिव्यांगों को अक्सर बाहर की दुनिया में अकेले चलना मुश्किल होता है क्योंकि उन्हें कहां मुड़ना या चलना चाहिए, या फिर उनके लिए अपने सटीक स्थान को तलाशना और वहां तक पहुंचना वाकई एक दुष्कर कार्य होता है। विशेष रूप से दृष्टिबाधित लोगों के लिए डिजाइन किया गया एक नेविगेटर जीपीएस के माध्यम से उनकी मंजिल को ट्रैक करता है ताकि उन्हें पता चल सके कि वे वास्तव में कहां हैं। साथ में एक वॉइस असिस्टेंट उन्हें अपने गंतव्य तक अपना रास्ता नेविगेट करने में मदद करता है।

2. उन्नत गतिशीलता उपकरण- ये उपकरण शारीरिक रूप से दिव्यांग लोगों को घूमने में मदद करते हैं। ये हल्के होते हैं और लोगों को शारीरिक गतिविधि और व्यायाम करने में मदद करने के लिए सहायक तकनीक का उपयोग करते हैं। गतिशीलता उपकरणों को लगाना आसान है और इनकी कार्य करने की प्रणाली भी आसान है, वे लोगों की उचित सहायता करते हैं ताकि वे आसानी से घूम-फिर सकें।

3. आसान तरीके से संवाद करने के लिए ऐप और तकनीक- ऐसे कई ऐप हैं जो सुनने और बोलने में अक्षम लोगों को दूसरों के साथ बेहतर ढंग से संवाद करने में मदद करते हैं। दो तरह के ऐप हैं जो बेहतर संचार के लिए सांकेतिक भाषा और भाषण का अनुवाद करते हैं। दिव्यांग लोगों के लिए स्मार्टफोन विशेष तकनीकों के साथ भी उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि वे अपने स्मार्टफोन को बिना बात या स्पर्श किए संचालित कर सकें। ये स्मार्ट फोन दिव्यांग लोगों के लिए टेक्स्ट मैसेज, वॉयस कॉल, वीडियो कॉल जैसे संचार को आसान बनाते हैं। 4. टेक व्हीलचेयर- आजकल व्हीलचेयर में आपको तमाम तरह की तकनीक मिल जाएगी। स्पीच ट्रांसलेटर से लेकर आंखों के मूवमेंट के सहारे सीढ़ियां चढ़ने तक, व्हीलचेयर के माध्यम से इन दिनों ऐसे तमाम काम किए जा सकते हैं। उनके पास वॉइस असिस्टेंट भी है, जो जरूरत पड़ने पर कॉल कर सकते हैं और दिव्यांगों की मंजिल को तलाशने के लिए व्हीलचेयर के साथ जीपीएस भी जुड़ा मिल जाएगा।

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