प्री-डिजीज मैनेजमेंट, डेटा के उपयोग और बुजुर्गों की देखभाल के प्रति बढ़ते रुझान से देश में हेल्थकेयर स्टार्ट-अप के लिए अनेक अवसर उपलब्ध करातेे हैं

Aazad Staff

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वर्तमान महामारी के दौर ने हालांकि पूरे हेल्थ केयर ईको सिस्टम को जबरदस्त दबाव में ला दिया है, लेकिन इस दबाव ने ही हमें इस संकट से उबरने के लिए इनोवेटिव साॅल्यूशन बनाने और विकसित करने के लिए प्रेरित किया है। इसी सिलसिले में आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने ‘हाउ टू बिकम ए ट्वेंटी फस्र्ट सेंचुरी हेल्थ स्टार्ट-अप’ विषय पर वेबिनार का आयोजन किया। इस वेबिनार में विभिन्न संगठनों के विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए और निष्कर्ष जाहिर किया कि प्री-डिजीज मैनेजमेंट, डेटा के उपयोग और बुजुर्गों की देखभाल के प्रति बढ़ते रुझान से देश में हेल्थकेयर स्टार्ट-अप के लिए अनेक अवसर उपलब्ध हो रहे हैं।

इस दौरान टेन्थपिन मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स के पार्टनर और मैनेजिंग डायरेक्टर इंडिया रघुराम जानापारेड्डी, अगत्सा की फाउंडर और सीओओ और टीआईई-बीआईआरएसी अवार्ड विजेता नेहा रस्तोगी, मेडिका हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के को-फाउंडर और एमडी उदयन लाहिरी, पोर्टिया मेडिकल के को-फाउंडर और सीओओ वैभव तिवारी, बिलेनियम दिवस के को-फाउंडर और डायरेक्टर भावेश कोठारी और आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी, जयपुर के प्रेसीडेंट डॉ. पी. आर. सोडानी जैसे विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. पल्लवी चैधरी अग्रवाल, हेड इनक्यूबेशन-सीआईआईई, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी जयपुर और डॉ. शीनू जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, चेयर-सीआईआईई, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी जयपुर ने वेबिनार का संचालन किया। वेबिनार के दौरान कोविड-19 महामारी के दौर में स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में सामने आने वाली सबसे अधिक दबाव वाली समस्याओं पर भी विचार-विमर्श किया गया।

टेन्थपिन मैनेजमेंट कंसल्टेंट्स के पार्टनर और मैनेजिंग डायरेक्टर इंडिया रघुराम जानापारेड्डी ने देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में नवाचारों के परिदृश्य और स्वास्थ्य तकनीक स्टार्ट-अप की भूमिका पर बात की। उन्होंने कहा, ‘‘आज स्वास्थ्य सेवा एक बहुआयामी दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है। हाल के महामारी के दौर में हमने देखा कि बाजार में अनेक नए इनोवेशन सामने आए और इन सबका फोकस उपचार पर केंद्रित रहा। स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नए साॅल्यूशंस 5 आयामों पर केंद्रित रहे हैं। पहला है डायग्नोस्टिक्स जो सामान्य शरीर संकेतक हैं, जैसे एक्स-रे से संबंधित डायग्नोस्टिक्स, ब्लड कल्चर। दूसरा, ऐसे इनोवेशंस, जिन्होंने डॉक्टरों को बेहतर निर्णय लेने में मदद की है। तीसरा, डिलीवरी जिसमें शामिल हैं आईपीडी, ओपीडी, ऑटोमेशन या पीएचसी पर समाधान, होम हेल्थकेयर से संबंधित डिलीवरी, क्लिनिकल ट्रायल से संबंधित डिलीवरी और रिमोट पेशेंट मैनेजमेंट। चैथा बिंदु डेटा से संबंधित है, हम रोगी के जीवन-चक्र से संबंधित डेटा कैसे एकत्र करते हैं, दुर्लभ बीमारियों से संबंधित डेटा, डेटा जो चिकित्सीय क्षेत्र में सहायक होगा। और पांचवां बिंदु- हेल्थकेयर स्टार्ट-अप्स और इनोवेशन की भूमिका और हेल्थकेयर में एआई को शामिल करने की तकनीक और महामारी के बाद स्टार्ट-अप के नवाचारों की गति। हमने देखा कि स्वास्थ्य सेवा प्रणाली में एआई के माध्यम से नवाचारों का उदय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में, विशेष रूप से सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हुआ है।’’

पोर्टिया मेडिकल के को-फाउंडर और सीओओ वैभव तिवारी ने भारत में 21वीं सदी के स्वास्थ्य स्टार्ट-अप होने के फायदों की चर्चा की और इन स्टार्ट-अप को मिलने वाले अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने एक स्थायी स्टार्ट-अप के निर्माण के तरीकों पर भी चर्चा की और कहा, ‘‘जब आप एक स्टार्ट-अप का निर्माण करते हैं तो सबसे पहले आप प्रोडक्ट या सर्विस पर ध्यान केंद्रित करते हैं, आप बाजार को देखते हैं और यह विचार करते हैं कि आप अपने व्यवसाय को कैसे बढ़ा सकते हैं और इस दिशा में टैक्नोलाॅजी का इस्तेमाल कहां कर सकते हैं। पहला सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या हम गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भुगतान करने को तैयार हैं?

निश्चित तौर पर महामारी ने इनोवेशंस को एक नई रफ्तार दी है और स्वास्थ्य देखभाल और लोगों की बेहतरी पर तेजी से ध्यान केंद्रित किया है। पिछले कुछ दशकों में जो नहीं किया जा सका था, वह अब संभव हुआ और इसे लेकर लोगों में भी एक बड़ा बदलाव देखा गया। यह सामने आया है लोग अब वेलनेस पर अधिक ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। इससे वेलनेस के बाजार में हिस्सेदारी में वृद्धि हुई है। आम आदमी में होमकेयर, टेलीकंसल्टेशन, मेडिकल शिक्षा को लेकर रुझान में इजाफा हुआ है और बाजार के नजरिए से, उत्पाद और सेवा की उपलब्धता के नजरिए से और टैक्नोलाॅजी को स्वीकार करने से इस दिशा में रुझान में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। टियर टू और टियर थ्री क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने के लिए बुजुर्गों की देखभाल और रोग-पूर्व प्रबंधन से संबंधित अभिनव समाधान अब साकार होने लगे हैं और स्टार्ट-अप द्वारा पेश किए गए ऐसे समाधान इस समय अद्भुत काम करेंगे। पिछले दो वर्षों में तैयार किए जा रहे डेटा ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के साथ हलचल पैदा कर दी है। ये सभी पहलू सफल हेल्थकेयर स्टार्ट-अप के लिए अवसर पैदा करेंगे।’’

बिलेनियम दिवस के को-फाउंडर और डायरेक्टर भावेश कोठारी ने स्टार्ट-अप की तैयारी और उनके लिए जरूरी फंडिंग पर बात की और कहा, ’’भारत में अस्पताल उद्योग कुल स्वास्थ्य सेवा का लगभग 75 से 80 प्रतिशत है। हम देख रहे हैं कि आरपीए जैसी टैक्नोलाॅजी सामने आ रही है, साथ ही, चिकित्सा पर्यटन और नीति और सरकार से प्रोत्साहन सहायता जैसे नए कदम भी उठाए जा रहे हैं, जो कि अभूतपूर्व है। वेलनेस क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं। फंडिंग किसी भी स्टार्ट-अप की सफलता का पैमाना नहीं होना चाहिए, हालांकि, यह उन क्षेत्रों में से एक हो सकता है जब आपका व्यवसाय बढ़ रहा हो। हेल्थकेयर स्टार्ट-अप को मूल्य का निर्माण करना चाहिए, जब वे तैयार हों तो उन्हें निवेश बढ़ाने की आवश्यकता होती है। कई निवेशकों ने इनोवेटिव स्टार्ट-अप को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए हंै, खासकर यदि वे प्रोडक्ट बेस्ड हैं।’’

अगत्सा की फाउंडर और सीओओ और टीआईई-बीआईआरएसी अवार्ड विजेता नेहा रस्तोगी ने एक उद्यमी के रूप में अपनी यात्रा और साकने आने वाली चुनौतियों की चर्चा की और कहा, ‘‘भारत में रोगियों के बीच महामारी के प्रकोप से पहले स्वास्थ्य सेवा के प्रति दृष्टिकोण हमेशा प्रतिक्रियाशील रहा है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू जिस पर प्रकाश डालने की आवश्यकता है, वह है सेल्फ माॅनिटरिंग जो अब तक गायब थी और यह अहसास कोविड-19 महामारी के बाद से बढ़ रहा है। अगर मरीज को दिल का दौरा पड़ रहा है, तो यह मापने के लिए अगत्सा ने सबसे छोटी ईसीजी मशीन विकसित की। हृदय संबंधी स्वास्थ्य की जानकारी देने के लिए यह उपकरण महत्वपूर्ण है। मल्टी-पैरामीटर डिवाइस को अगत्सा द्वारा पेश किया गया था। हेल्थकेयर स्टार्ट-अप को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उत्पाद व्यावहारिक है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण है कि ग्राहक को उस उत्पाद के बारे में आश्वस्त होना चाहिए जिसे लॉन्च किया जा रहा है। सबसे बड़ी चुनौती का सामना भारत का नियामक ढांचा है, विशेष रूप से चिकित्सा उपकरणों के लिए जहां उनमें से अधिकांश विनियमित नहीं हैं। दरअसल ग्राहकों का भरोसा हासिल करने के लिए हर उस प्रोडक्ट के लिए सर्टिफिकेशन हासिल करना चाहिए, जिसे भारत में लाॅन्च किया जा रहा है।’’

मेडिका हॉस्पिटल्स प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता के को-फाउंडर और एमडी उदयन लाहिरी ने स्टार्ट-अप द्वारा स्केलिंग और फंड जुटाने के दौरान सामने आने वाली रुकावटों की चर्चा की और कहा, ‘‘बड़े सपने देखना स्टार्ट-अप के लिए महत्वपूर्ण है और वे उसके पास एक स्पष्ट विजन होना चाहिए कि उद्यमी क्या करना चाहता है। एक स्पष्ट योजना और दृष्टि ही एकमात्र ऐसी चीज है जो निवेशकों को आकर्षित करती है। एक उद्यमी के सफर में एक अच्छी टीम भी जरूरी है। उद्यमी को अपने उत्पाद के बारे में आश्वस्त होना चाहिए और क्या उत्पाद ग्राहकों के लिए जीवन को आसान बना देगा। यह भी महत्वपूर्ण है कि आपके द्वारा लॉन्च किया गया उत्पाद आवश्यकता-आधारित होना चाहिए, जिसका अर्थ है कि उत्पाद नवीन होना चाहिए और उसे ग्राहकों के जीवन में मूल्य जोड़ने में सक्षम होना चाहिए।’’

डॉ. शीनू जैन, एसोसिएट प्रोफेसर, चेयर-सीआईआईई, आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी जयपुर ने कहा, ‘‘सीआईआईई का प्रमुख कार्य उद्यमिता को बढ़ावा देना है। साथ ही टिकाऊ, स्केलेबल और लाभदायक व्यवसाय मॉडल के निर्माण में सहायता करना, सीड फंडिंग प्रदान करना, इनक्यूबेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रदान करना, उत्पादों/सेवाओं तक पहुंच को सक्षम करना और स्टार्ट-अप का मार्गदर्शन करने में ज्ञान और अनुभव के साथ एक मजबूत टीम का निर्माण करना है। आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी ने एनएसक्यूएफ फ्रेमवर्क ढांचे के तहत हेल्थ एंटरप्रेन्योरशिप में पीजी डिप्लोमा लॉन्च किया है और इसे यूजीसी द्वारा अनुमोदित किया गया है। यह प्रोग्राम देशभर में सिर्फ आईआईएचएमआर यूनिवर्सिटी में ही पेश किया जाता है।’’ उन्होंने ग्रैंड हेल्थ इनोवेशन चैलेंज के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी।

इस वेबिनार में हेल्थ स्टार्ट-अप से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर गंभीर चर्चा की गई। इस दौरान जिन विषयों पर चर्चा की गई, उनमें प्रमुख हैं- स्वास्थ्य स्टार्ट-अप होने का लाभ, उत्पाद के निर्माण के बिना व्यवसाय को मान्य करना, स्टार्ट-अप के लिए फायनेंसिंग के अवसर, भारत में फार्मेसी, होम हेल्थकेयर, डायग्नोस्टिक्स, बायोटेक जैसे क्षेत्रों में हेल्थ स्टार्ट-अप की शुरुआत करने की राह में आने वाली चुनौतियां, इत्यादि। इस क्षेत्र में इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी, डॉक्टर-रोगी अनुपात में असमानता और स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती मांग जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। चर्चा के दौरान इस बात पर भी ध्यान केंद्रित किया गया कि दुनिया भर में हेल्थकेयर स्टार्ट-अप कैसे काम करते हैं।

 

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