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जानें क्या है गुरु पूर्णिमा का महत्व

व्यक्ति के जीवन को नई दिशा देने वाले होते है गुरु।

Published on: 27 Jul 2018

हिन्‍दू कैलेंडर के मुताबिक आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहा जाता हैं। इसी दिन महाभारत और चार वेदों के रचयिता महर्षि  कृष्‍ण द्वैपायन व्‍यास जिन्हे महर्षि वेद व्‍यास के नाम से भी जाना जाता है।  वेद व्‍यास का जन्‍म आज ही के दिन हुआ था। गुरु पूर्णिमा को व्‍यास पूर्णिमा भी कहा जाता है।

गुरु पूर्णिमा 2026 में 29 जुलाई, बुधवार को मनाई जाएगी। यह पवित्र दिन आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को आता है, जब लोग अपने आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षकों और मार्गदर्शकों के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। शुभ मुहूर्त और तिथियां

* पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 28 जुलाई 2026 को शाम 06:18 बजे से * पूर्णिमा तिथि की समाप्ति: 29 जुलाई 2026 को रात 08:05 बजे तक * पूजा का मुख्य समय: 29 जुलाई 2026 को सुबह 05:40 बजे से दोपहर 12:00 बजे के बीच

गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु की पूजा की पूजा की जाती है। इसके पिछे ये मान्यता है कि गुरु के बिना ज्ञान की प्राप्‍ति नहीं हो सकती इसलिए गुरु की कृपा से व्‍यक्ति कुछ भी हासिल कर सकता है। यहीं कारण है कि गुरु को भगवान से भी ऊपर दर्जा दिया गया है। पुराने समय में गुरुकुल में रहने वाले विद्यार्थी गुरु पूर्णिमा के दिन विशेष रूप से अपने गुरु की पूजा-अर्चना करते थे।

✨ यहाँ गुरु पूर्णिमा के महत्व और इतिहास से जुड़ी जानकारी का एक नया और विस्तृत रूप प्रस्तुत है।

गुरु पूर्णिमा: महत्व, पौराणिक कथा और व्यास पूर्णिमा का दिन

गुरु का अर्थ - गुरु’ शब्द संस्कृत के दो शब्दों ‘गू’ और ‘रू’ से मिल कर बना है। ’गू’ का अर्थ होता है अंधेरा या अज्ञानता और ‘रू’ का अर्थ है ‘निवारण’।  यानी गुरु का अर्थ हुआ एक ऐसा व्यक्ति जो अज्ञानता रूपी अंधकार को जीवन से मिटा दे।

गुरु पूर्णिमा के दिन लोग अपने गुरु की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद लेते हैं। गुरु की दी गई शिक्षा के लिए उन्हें धन्यवाद देते हैं। नेपाल में गुरु पूर्णिमा के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है और इस दिन को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। कई लोग इस दिन को भगवान बुद्ध की याद में भी मनाते है।