Ganesh Chaturthi (गणेश चतुर्थी)

Sarita Pant

Festivals

Ganesh Chaturthi (गणेश चतुर्थी), also known as Vinayaka Chaturthi is the Hindu festival of Ganesha, the son of Shiva and Parvati, who is believed to bestow his presence on earth for all his devotees in the duration of this festival, It is the birthday of Lord Ganesha who is widely worshipped as the god of wisdom, prosperity and good fortune.

गणेश-चतुर्थी भारत में मनाए जाने वाला सबसे प्रसिद्ध त्योंहार है। हर साल ये त्यौहार  हिन्दू धर्म के लोगों के द्वारा बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है।किसी भी नये  कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी लोगों द्वारा हमेशा पूजे जाते है। महाराष्ट्रा में यह उत्सव बहुत ही धूम-धाम से मनाया जाता है हालाँकि अब ये भारत के लगभग सभी राज्यों में मनाया   जाता है।

गणेश उत्सव 10 दिनों के लिये अगस्त और सितंबर महीने  में मनाया जाता है गणेश चतुर्थी पूजा दो प्रक्रियाओं को शामिल करती है; पहला मूर्ति स्थापना और दूसरा मूर्ति विसर्जन (इसे गणेश विसर्जन भी कहा जाता है)। हिन्दू धर्म में एक रीति प्राणप्रतिष्ठा पूजा की जाती है (मूर्ति में उनके पवित्र आगमन के लिये) तथा शोधसोपचरा (भगवान को 16 तरीकों से सम्मान देना)। 10 दिनों की पूजा के दौरान कपूर, लाल चन्दन, लाल फूल, नारियल, गुड़, मोदक और दुरवा घास चढ़ाने की प्रथा है। पूजा की समाप्ति के समय गणेश विसर्जन में लोगों भारी भीड़ विघ्नहर्ता को खुशी-खुशी विदा करती है।

सभी बच्चेजो  भगवान गणेश को बहुत पसंद करते है और उनकी पूजा कर बुद्धि तथा सौभग्य का आशीर्वाद प्राप्त करते है। इस पर्व की तैयारी  एक महीने पहले, हफ्ते या उसी दिन से शुरु कर देते है।बाजार में  उत्सवी माहौल पूरी लय में रहता है। जगह जगह पर दुकानें गणेश की मूर्तियों से भरी रहती है और लोगों के लिये प्रतिमा की बिक्री को बढ़ाने के लिये बिजली की रोशनी की जाती है।सभी भक्त  भगवान गणेश को अपने घर ले आते है तथा पूरी आस्था श्रद्धा से मूर्ती की स्थापना करते है।

हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है कि जब गणेश जी घर पर आते है तो ढ़ेर सारी सुख, समृद्धि, बुद्धि और खुशी ले आते है, हालाँकि जब वो हमारे घर से प्रस्थान करते है तो हमारी सारी बाधाएँ तथा परेशानियों को साथ ले जाते है।

ऐसा मानना है भगवान गणेश को बच्चे बहुत प्रिय है और उनके द्वारा उन्हें मित्र गणेश बुलाते है। लोगों का समूह गणेश जी की पूजा करने के पंडाल तैयार करता है। वो लोग पंडाल को फूलों और प्रकाश के द्वारा आकर्षक रुप से सजाते है। आसपास के बहुत सारे लोग प्रतिदिन उस पंडाल में प्रार्थना और अपनी इच्छाओं के लिये आते है। भक्तगण भगवान गणेश को बहुत सारी चीजें चढ़ाते है गणेश जी को मोदक सबसे पसंदीदा है।

ऐसा माना जाता है कि जो कोई पूरी भक्ति और विश्वास के साथ उनकी पूजा करेगा उसे वो खुशी, ज्ञान, घन तथा लंबी आयु प्रदान करेंगे। गणेश चतुर्थी के दिन लोग सुबह जल्दी ही स्नान कर लेते है, साफ कपड़े पहन कर भगवान की पूजा करते है। वो मंत्रोच्चारण, आरती गाकर, हिन्दू धर्म के दूसरे रिती-रिवाज निभाकर, भक्ति गीत गाकर भगवान को बहुत कुछ चढ़ाते है और प्रार्थना करते है।

गणेश चतुर्थी को कई नामों से जाना जाता है इसमें से कुछ है- एकदन्ता, असीम, शक्तियों के भगवान, हेरांबा (विघ्नहर्ता), लंबोदरा, विनायक, भगवानों के भगवान, बुद्धि, समृद्धि तथा संपत्ति के भगवान आदि।

बहुत सी कथाये भी है कि माता पार्वती ने स्नान करने से पूर्व अपनी मैल से एक बालक को उत्पन्न करके उसे अपना द्वारपालबना दिया। शिवजी ने जब प्रवेश करना चाहा तब बालक ने उन्हें रोक दिया। इस पर शिवगणोंने बालक से भयंकर युद्ध किया परंतु संग्राम में उसे कोई पराजित नहीं कर सका। इस बात से  भगवान शंकर ने क्रोधित होकर अपने त्रिशूल से उस बालक का सर काट दिया। इससे भगवती शिवा क्रुद्ध हो उठीं और उन्होंने प्रलय करने की ठान ली। भयभीत देवताओं ने देवर्षिनारद की सलाह पर जगदम्बा की स्तुति करके उन्हें शांत किया। शिवजी के निर्देश पर विष्णुजीउत्तर दिशा में सबसे पहले मिले जीव (हाथी) का सिर काटकर ले आए। मृत्युंजय रुद्र ने गज के उस मस्तक को बालक के धड पर रखकर उसे पुनर्जीवित कर दिया। माता पार्वती ने हर्षातिरेक से उस गजमुखबालक को अपने हृदय से लगा लिया और देवताओं में अग्रणी होने का आशीर्वाद दिया।

भगवान शंकर ने बालक से कहा-गिरिजानन्दन! विघ्न नाश करने में तेरा नाम सर्वोपरि होगा। तू सबका पूज्य बनकर मेरे समस्त गणों का अध्यक्ष हो जा। गणेश्वर!तू भाद्रपद मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी को चंद्रमा के उदित होने पर उत्पन्न हुआ है। इस तिथि में व्रत करने वाले के सभी विघ्नों का नाश हो जाएगा और उसे सब सिद्धियां प्राप्त होंगी।

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