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Home Mahadevi Verma (महादेवी वर्मा)
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महादेवी वर्मा (Mahadevi Verma)

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Hindi

महादेवी वर्मा

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले मे प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा का जनम २६ मार्च सन १९०७ मे हुआ था| इन्हे आधुनिक युग की मीरा पुकारा जाता है| महादेवी जी ने हिंदी गध को भी कविता जैसे मधुरता प्रधान की| उनके पात्र समाज के दलित शोबित लोग, पशु-पक्षी आदि है| महादेवी आधुनिक युग की प्रसिद्ध कवयत्री एवं गधह लेखिका मानी जाती है|इन्होने बी-ए जबलपुर से की वो अपने घर मे सबसे बड़ी थी उनके दो भाई और एक बेहन थी|इनकी शादी १९१४ मे डॉ स्वरुप नरेन वर्मा के साथ इंदौर मे ९ साल की उम्र मे हुई, वो अपने माँ पिताजी के साथ रहती थी क्योकि उनके पति लखनऊ मे पढ़ रहे थे| इनकी सारी शिक्षा अल्लाहबाद से की 'यामा और दीपशिखा' पर उन्हे भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार मिला है| भारत सरकार ने १९५६ मे 'पदमभूषण' से समान्नित किया|आपकी रचनायो मे संस्कृत निष्ठ शब्दों की प्रचुरता है|

महादेवी वर्मा की मृत्यु ११ सितम्बर 1987, अशोक नगर अल्लाहबाद मे हुआ|

संस्मरण

अतीत के चलचित्र , समृति की रेखायाई पाठ के साथी, मेरा परिवार, यहाँ महादेवी वर्मा के 'मेरे बचपन के दिन ' लेख के कुछ दृश्य साकार किये जा रहे है| बचपन की यादो मे एक विचित्र सा आकर्षण होता है| महा देवी वर्मा अपने परिवार मे कई पीडियो के बाद उत्पन हुई |

उनके परिवार मे दौसो सालो से कोई लड़की पैदा नही हुई थी यदि होती तो उसी मार दी जाती थी |दुर्गा पूजा के कारण आपका जन्म हुआ | आपके दादा फारसी और उर्दू तथा पिताजी अंग्रेजी जानते थे| माता जी जबलपुर से हिंदी सीख कर आई थी, आपने पंचतंत्र और संस्कृत का अध्यन किया |

महादेवी वर्मा जी को काव्य प्रतियोगिता मे चांदी का कटोरा मिला था | जिसे इन्होने गाँधी जी को दे दिया था | महादेवी वर्मा कवि सम्मेलन मे भी जाने लगी थी, वो सत्याग्रह आंदोलन के दोरान कवि सम्मेलन मे अपनी कवितायेँ सुनाती और आपको हमेशा प्रथम पुरस्कार मिला करता था | महादेवी वर्मा मराठी मिश्रित हिंदी बोलती थी | महादेवी वर्मा के 'मेरे बचपन के दिन ' लेख के कुछ दृश्य साकार किये जा रहे है |

काव्य संग्रह

नीहार (१९३३), रश्मि (१९३२), नीरजा( १९३३), सहह्गीत (१९३५), दीपशिखा (१९४२), यामा

पुनर्मुद्रित संकलन:

यामा (1940) , दीपगीत (1983),नीलाम्बरा (1983),आत्मिका (1983)

कुछ प्रतिनिधि कविताएँ

अधिकार, अलि! मैं कण-कण को जान चली , अलि अब सपने की बात , अश्रु यह पानी नहीं है उत्तर, कहां रहेगी चिड़िया , किसी का दीप निष्ठुर हूँ ,कौन तुम मेरे हृदय में, क्या जलने की रीत, क्या पूजन क्यों इन तारों को उलझाते?, जब यह दीप थके ,जाग-जाग सुकेशिनी री! ,जाग तुझको दूर जाना, जाने किस जीवन की सुधि ले, जीवन दीप, जीवन विरह का जलजात ,जो तुम आ जाते एक बार, जो मुखरित कर जाती थीं, तुम मुझमें प्रिय, तेरी सुधि बिन, दिया क्यों जीवन का वरदान ,दीपक अब रजनी जाती रे, दीपक चितेरा, दीपक पर पतंग, धीरे-धीरे उतर क्षितिज से, धूप सा तन दीप सी मैं, नीर भरी दुख की बदली |

पुरस्कारों से समानित किया गया

 

१९७९ :साहित्य अकादेमी फेल्लोव्शिप

१९८२ :ज्नंपिथ पुरस्कार

१९५६ :पदम् भूषण

१९८८ :पदम विभूषण

 

English


 

Comments   

 
+5 #5 Thomas Abraham 2010-09-20 11:23
Good one, Sarita.
Best regards,
Thomas Abraham
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+3 #4 Prashanta Roy 2010-09-02 12:22
Hi Sarita,

Great one again...God Bless You!!!

Thanks,
Prashanta Roy
Quote
 
 
+2 #3 jeet bhattacharjee 2010-08-23 17:34
excellent!
Quote
 
 
+4 #2 Nitin Sharma 2010-08-23 09:55
Great!!
Quote
 
 
+4 #1 J Mathur 2010-08-22 11:21
Good brief abt Mahadevi Verma. I hv not read her but u hv created interest.
Thanks,
JM
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